केंद्रीय सरकारी कर्मचारी कल्याण आवास संगठन
के नियमों एवं विनियमों
सोसायटी का नाम एवं पता:
1.
“सोसायटी” का अर्थ होगा “केन्द्रीय सरकारी कर्मचारी कल्याण आवास संगठन” जिसकी स्थापना केन्द्रीय सरकार के कर्मचारी और सोसायटी के कर्मियों (सेवारत के साथ-साथ सेवानिवृत्त/अवकाश ग्रहण करने वाले) के सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने, नियंत्रण और पूरे भारत वर्ष में “लाभ निरपेक्ष” आधार पर विभिन्न चुनिंदा स्थानों पर आवास के विकास के समन्वय के उद्देश्य के साथ की गई थी। सोसायटी का पंजीकृत कार्यालय दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र में स्थित होगा और वर्तमान में “निर्माण भवन, मौलाना आजाद रोड, नई दिल्ली-110011 के रूप में कार्य करेगा।”
साधारण निकाय:
2.
(i) संस्था के स्मरणपत्र के पैरा 6 के अनुसार साधारण निकाय में 14 सदस्य होंगे।
(ii) साधारण निकाय की सदस्यता 30 से ज्यादा नहीं होगी।
(iii) समय समय पर नए सदस्यों का दाखिला और बदलाव का फैसला शहरी रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
(iv) साधारण निकाय की जरूरत पड़ने पर बैठक होगी, लेकिन यह बैठक साल में एक बार से कम
नहीं होगी।
(v) साधारण निकाय को सोसायटी के लक्ष्यों एवं उद्देश्यों का विस्तार करने के लिए बिना पूर्वगामी
के प्रतिकूल प्रभाव डाले पूरी शक्तियाँ एवं कर्तव्यों द्वारा निम्नलिखित कार्यों को पूरा करना
होगाः-
(क) सोसायटी के लक्ष्यों एवं उद्देश्यों के भीतर सोसायटी के उचित कार्यकरण के लिए सामान्य नीति दिशानिर्देश बनाना;
(ख) सोसायटी के नियमों एवं विनियमों को बनाना,संशोधन और बदलना;
(ग) उनके समक्ष और उनके विचार एवं मंजूरी हेतु कोई विषय।
शासी परिषद के सदस्य:-
3. (i) परिषद में ग्यारह सदस्य होंगे। परिषद के सभी सदस्यों को सोयायटी का सदस्य माना जाएगा। शहरी रोजगार और गरीबी उपशमन, मंत्रालय (एमओयूइपीए) समय-समय पर परिषद के गठन को अधिसूचित करेंगे। इस परिषद में निम्नलिखित होंगेः-
1. सचिव, शहरी रोजगार और गरीबी उपशमन, मंत्रालय, पदेन अध्यक्ष
2. सचिव, (व्यय), वित्त मंत्रालय या उनके नामांकित व्यक्ति,पदेन सदस्य
3. सचिव, विधि मंत्रालय या उनके नामांकित व्यक्ति,पदेन सदस्य
11.सोसायटी के कोषाध्यक्ष, पदेन सदस्य
सोसायटी के पंजीकरण के एक साल के भीतर इस खंड के अनुसार, एमओयूईपीए परिषद का पुनर्गठन कर सकती है।
(ii) सोसायटी के प्रत्येक सदस्य सोसायटी की वार्षिक रिपोर्ट प्राप्त करने के पात्र होंगे।
सदस्यता:
3 (iii) सदस्यों द्वारा सोसायटी को कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
शासी परिषद का कार्य एवं शक्तियाँ:
4. सोसायटी के कार्यों के प्रबंध परिषद में निहित होंगे और परिषद द्वारा पूर्वगामी व्यापकता पर प्रतिकूल असर डाले बिना निम्नलिखित कार्य करेगा: -
(क) सोसायटी के कार्यों का प्रबंध और उन्हें चलाना;
(ख) आवश्यक स्टाफ और उनकी सेवा शर्तों को मंजूर करना;
(ग) सोसायटी की अधिशेष निधियों के निवेश के लिए नीति बनाना;
(घ) सोसायटी के वार्षिक बजट और खातों को मंजूर करना;
(ङ) लेखापरीक्षकों को नियुक्त करना एवं उनके पारिश्रमिक को तय करना;
(च) कार्यपालक समिति, क्षेत्र समितियाँ, मुख्य कार्यपालक,कोषाध्यक्ष या सोसायटी के अन्य किसी अधिकारी(ओं) को कार्य एवं शक्तियों का प्रत्यायोजन।
बैठकें:
5. अध्यक्ष के जरूरी समझने पर परिषद की बैठक बुलाई जा सकती है, लेकिन यह बैठक एक साल में एक बार जरूर होगी। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में, परिषद के वरिष्ठतम सदस्य की अध्यक्षता में परिषद की बैठक होगी। अध्यक्ष या परिषद के वरिष्ठतम सदस्य जो अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे होंगे, उनके पास मताधिकार का अधिकार होगा बैठक के लिए चार सदस्यों का कोरम होगा।
6. वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद, साल में एक बार परिषद के उन सदस्यों के नाम,पते और व्यवसाय संबंधी सूची को सोसायटी के रजिस्ट्रार के यहाँ दायर करनी होगी, जिन्हें सोसायटी पंजीकरण अधिनियम,1860 की धारा 4 के अनुसार, सोसायटी के कार्यों का प्रबंध करने की जिम्मेदारी दी गई है।
7. परिषद की बैठक के लिए कम से कम 7 दिन पहले नोटिस दिया जाएगा।
8. परिषद द्वारा असाधारण बैठक किसी भी समय बुलाई जा सकती है या विशेष प्रयोजन के लिए परिषद के चार सदस्यों से कम नहीं की माँग/मंजूरी पर जिसे अधिसूचित किया गया हो, बैठक बुलाई जा सकती है।
9. अध्यक्ष द्वारा तय की गई तिथि,समय और स्थान पर सोसायटी के वित्तीय वर्ष् की समाप्ती के छह महीनों के भीतर वार्षिक आम बैठक परिषद की बैठक आयोजित की जाएगी।
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वितरण द्वारा संकल्प पारित करना:
10.इन नियमों में अन्य प्रकार से उपलब्ध, परिषद या कार्यपालक समिति के सभी सदस्यों को लिखित में संकल्प का वितरण करना जैसा भी मामला हो, और परिषद या कार्यपालक समिति की बैठक में उपस्थित होने की हकदारी और बहुमत से मंजूर संकल्प वैध और प्रभावी होगा यदि यह विधिवत तरीके से आयोजित परिषद या कार्यपालक समिति में पास हुआ हो|
कार्यकारी समिति;
11.सोसायटी की कार्यकारी समिति निम्नलिखित रुप से गठित होगी, जो पदेन सदस्य होंगे: -
संयुक्त सचिव (आवास), |
शहरी रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन मंत्रालय |
अध्यक्ष |
संयुक्त सचिव (वित्त), |
शहरी रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन मंत्रालय |
सदस्य |
संयुक्त सचिव (स्टाफ कल्याण), |
कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय |
सदस्य |
हुडको के नामित व्यक्ति |
सदस्य |
|
जेसीएम के राष्ट्रीय परिषद के नामित व्यक्ति |
सदस्य |
|
राज्य-स्तर का प्रतिनिधि |
सलाहकार समिति |
सदस्य |
कोषाध्यक्ष |
सदस्य |
|
मुख्य कार्यपालक अधिकारीr |
सदस्य-सचिव |
कार्यकारी समिति का कार्यकरण:
12.(क) परिषद द्वारा जारी किसी विशेष निदेशों की शर्त पर, कार्यकारी समिति सेवारत और सेवानिवृत्त केंद्र सरकार के कर्मचारियों की जरुरत को पूरा करने के लिए आवास योजना तैयार करेगी और सोसायटी के दैनिक काम काज पर ध्यान देगी| नियमन के लिए नियमों या दिशानिर्देशों को बनाना-
(i) सोसायटी के संस्था स्मरण पत्र के उद्देश्य खंड के अनुसार मकानों के लिए आवेदनों का पंजीकरण|
(ii) आवासी योजनाएं;
(iii) स्टेशनों/शहरों जहां पर आवासीय योजनाओं का काम किया जाना
(iv) आवेदकों द्वारा जमा और भुगतान| आवेदकों से 100/- रु का अप्रतिदेय प्रवेश शुल्क लेना| आवेदकों द्वारा सोसायटी की सदस्यता का दावा अधिकार के रुप में किया जा सकेगा;
(v) आवेदनों की वापसी;
(vi) लगाए जाने वाला दंड;
(vii) मकानों का आवंटन;
(viii) आवंटियों द्वारा मकानों का निपटान;
(ix) आवासीय योजनाओं में सामूहिक सेवाओं का अनुरक्षण;
(x) केंद्र सरकार के कर्मचारियों को नगद ऋण उपलब्ध कराने के लिए;
(xi) अन्य कोई विषय|
(ग) कार्यकारी समिति द्वारा सोसायटी के खातों और वित्त पर विचार एवं जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट परिषद को देगी|
(घ) परिषद द्वारा मंजूर बजट आकलन और तय की गई सीमा के भीतर विविध आकस्मिक मदों के व्यय को मंजूरी देना| कार्यपालक समिति, आवश्यकता पड़ने पर सोसायटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को व्यय की मंजूरी का अधिकार दे सकती है|
(ङ) परिषद द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार अधिशेष निधियों का निवेश,निकालना, बनाना, स्वीकार्य,पृष्ठांकन,रियायत,निष्पादन और वचन पत्र, विनिमय बिलों और परक्राम्य या हस्तांतरण उपकरणों को जारी करना |
(च) परिषद द्वारा अनुमोदित आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति|
(छ) कार्यपालक समिति उन सभी अन्य विषयों पर विचार करेगी जिन्हें परिषद द्वारा उसे दिया गया होगा|
(ज) सोसायटी के निर्माण और विकास कार्य तथा क्षेत्रीय समितियों के कार्यों पर कड़ी निगरानी रखना और निर्धारित समयावधि के अनुसार विकास कार्य, निर्माण और निरीक्षण सारणी और अन्य गतिविधियॉं चल रही है, को सुनिश्चित करना|
(झ) कार्यपालक समिति उचित समझने पर अपनी ओर से विर्निदिष्ट विषयों पर काम करने के लिए उपसमितियों को नियुक्त कर सकती है|
(ञ) कार्यपालक समिति द्वारा राज्य सरकारों और/या सार्वजनिक और निजी एजेंसियों और/या भूमि मालिकों,सहकारियों से भूमि अधिग्रहण, इमारतों/फ्लैटों तथा भुगतान किए जाने वाले मुआवजा/या कीमत का मोलभाव करेगी|
(ट) प्रतिभूति के बिना और प्रतिभूति के साथ धन उधार लेना|
कार्यकारी समिति बैठकें:
13. अध्यक्ष द्वारा जब कभी आवश्यक समझा जाएगा कार्यकारी समिति की बैठक बुलाई जा सकेगी लेकिन यह बैठक तिमाही में एक बैठक से कम नहीं होगी| अध्यक्ष या उनकी अनुपस्थिति में कार्यपालक समिति के वरिष्ठतम सदस्य द्वारा बैठक की अध्यक्षता की जाएगी और वे मत दे सकेंगे| चार सदस्यों की उपस्थिति से कोरम पूरा माना जाएगा|
सलाहकार एवं क्षेत्रीय समितियाँ :
14. (i) परिषद द्वारा एमओयूईपीए,जेसीएम के नामित व्यक्तियों और हुडको के आंचलिक/क्षेत्रीय प्रमुख की तीन से पांच सदस्यों वाली राज्य स्तरीय सलाहकार समितियों की नियुक्त्ति की जा सकती है| एमओयूईपीए के नामित व्यक्ति प्रत्येक ऐसी समिति के सचिव सदस्य होंगे| सलाहकार समिति द्वारा उसके क्षेत्र में रहने वाले केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों की आवासीय आवश्यकताओं के बारे में आवश्यक पुनर्निवेशन उपलब्ध कराएगी और आवासीय योजनाओं को बनाने और उसके संवर्धन के लिए कार्यपालक समिति की सहायता करेगी|
(ii) परिषद, आवासीय योजनाओं को आरंभ करने और उसे लागू करने के लिए कम से कम तीन सदस्यों वाली क्षेत्रीय समितियों की भी नियुक्ति कर सकती है| क्षेत्रीय समितियों से सदस्य एमओयूईपीए,जेसीएम के नामित व्यक्ति, इंजीनियर और/या वित्त संवर्ग से होंगे| एमओयूईपीए के नामित व्यक्ति क्षेत्रीय समिति के सदस्य सचिव होंगे|
मुख्य कार्यपालक अधिकारी (मुकाअ):
15. एमओयूईपीए द्वारा पूर्णकालिक (मुकाअ) नियुक्त किया जाएगा जो भारत सरकार में निदेशक से नीचे के पद का न हो| वह सोसायटी के सामान्य दैनिक प्रशासनिक/प्रकार्य के कार्य करेंगे और परिषद तथा कार्यपालक समिति के सचिव के तौर पर कार्य करेंगे|
16. उपरोक्त में उल्लेखित कार्यों के प्रतिकूल प्रभाव के बिना मुख्य कार्यपालक अधिकारीत:
(क) उन्हें सौंपी गए सभी कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए कार्यपालक समिति के माध्यम से परिषद के प्रति जिम्मेदार होंगे|
(ख) परिषद या क्षेत्रीय समितियों या अन्य समिति या उपसमिति जिनकी नियुक्ति की जा सकती है, के समक्ष, उन सभी विषयों जिन पर उनके द्वारा कार्रवाई करने की आवश्यकता होगी, संज्ञान में लाना|
(ग) अस्वस्थता के कारण या परिषद के अध्यक्ष या कार्यपालक समिति के अध्यक्ष द्वारा बैठक में भाग लेने की छूट दी गई हो, जैसा भी मामला हो, परिषद/कार्यपालक समिति आदि की एसी बैठकों में भाग लेना होगा और एसी बैठकों के कार्यवृत्तों को रिकार्ड करना होगा|
(घ) परिषद की ओर से सभी प्रकार के पत्राचार और सभी संविदाओं को निष्पादित करना|
(ड.) सोसायटी द्वारा चलाई गई योजनाओं के लाभार्थियों से प्राप्त धन के लिए परिषद और कार्यपालक समिति के प्रति जिम्मेदार होंगे
(च) जब कभी भी वह कोषाध्यक्ष के रुप में कार्य करेंगे वे सोसायटी द्वारा प्राप्त किसी प्रकार के धन को बिना किसी देरी के जमा करेंगे और खातों को संभालेंगे|
(छ) आवासीय गतिविधियों के मामलों पर केंद्रीय सरकार, राज्य सरकार और अन्य एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में रहना|
(ज) निरीक्षण और निर्माण में गुणवत्ता, निर्माण की देख रेख और निरीक्षण सारणी को सुनिश्चित करना|
कोषाध्यक्ष:
17. एमओयूईपीए द्वारा कोषाध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी जो भारत सरकार में उप वित्तीय सलाहकार से नीचे के पद के नहीं होंगे और वह मुकाअ के प्रति जिम्मेदार होंगे|
18.1 कोषाध्यक्ष :-
(क) अस्वस्थता के कारण या उसके अध्यक्ष द्वारा बैठक में भाग लेने की छूट दी गई हो, परिषद/कार्यपालक समिति आदि बैठकों में भाग लेना होगा और जैसी जरुरत होगी उसके अनुसार सोसायटी के खातों और वित्तीय संबंधी सूचनाएं उपलब्ध करानी होगी|
(ख) वह लाभार्थियों द्वारा दिए जाने वाले सभी अंशदानों और सोसायटी की योजनाओं के विधिवत एकत्रीकरण और परिषद/कार्यपालक समिति के निर्णयों के अनुसार राशि के संवितरण की देखरेख के लिए जिम्मेदार होंगे| वे सोसायटी की नगदी,चैक बुक,मुहर और प्रतिभूतियों को सुरक्षित रखने के सभी उचित एवं विधिवत एहितयातन उपाय सुनिश्चित करेगें| प्राप्त धन को बिना किसी देरी के सोसायटी के बैंक खाते में जमा कराएंगे|
(ग) परिषद/कार्यपालक समिति/मुकाअ अधिकारी के लिए वित्तीय गतिविधियों की आवधिक रिटर्न तैयार करेगें| जब कभी उन्हें कहा जाएगा वह सोसायटी के कार्यकरण के किसी भी पहलू का वित्तीय विश्लेषण भी तैयार करेगें|
(घ) सोसायटी का वार्षिक बजट और अंतिम वित्तीय लेखों को तैयार करेगें|
(ङ) लेखा कर्मचारियों की कार्यप्रणाली का पर्यवेक्षण करेगें|
18.2 अध्यक्ष की शक्तियॉं :
समय-समय पर शाषी परिषद द्वारा प्रत्यायोजित शक्तियों का अध्यक्ष द्वारा उपयोग किया जाएगा|
19. आय का स्रोत एवं निधियों का उपयोग:-
सोसायटी की निधियों में निम्नलिखित शामिल होंगे:
i) सोसायटी के उददेश्यों को बढ़ाने में सरकार द्वारा दिया गया अनुदान;
ii) अन्य स्रोतों से सोसायटी को प्राप्तियॉं जिसमें उधार राशि या बिना प्रतिभूति की राशि शामिल है;
iii) निवेशों से आय;
iv) अन्य स्रोतों से अंशदान;
बैंकिंग व्यवस्था:
20.परिषद द्वारा अनुमादित राष्ट्रीय बैंकों में सोसायटी अपना बैंक खाते का प्रचालन करेगी| सोसायटी के कोषाध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी या परिषद द्वारा अनुमोदित अन्य अधिकारियों द्वारा संयुक्त रुप से बैंक खाते का प्रचालन किया जाएगा|
बही खाते:
21.कार्यपालक समिति को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी राशि उचित खाता और अन्य संदंर्भित अभिलेख रखें गए हैं और उसे सोसायटी द्वारा और उसकी ओर से खर्च किया गया है तथा उसके साथ सभी वाउचर लगे हुए हैं| बहीखातों/दस्तावेजों का रखरखाव उचित प्रकार ढंग से किया जाएगा|
22.लेखाओं को 31 मार्च को बंद किया जाएगा और आय एवं व्यय खाता और तुलनपत्र को विधिवत लेखापरीक्षित करने के बाद उपलब्ध कराया जाएगा| कार्यपालक समिति की रिपोर्ट के साथ विधिवत लेखापरीक्षित लेखाओं को शाषी परिषद की बैठक में उसकी मंजूरी हेतु प्रस्तुत किया जाएगा|
लेखापरीक्षा:-
23. सोसायटी की वार्षिक आम बैठक में प्रत्येक वर्ष के लिए सोसायटी के लेखापरीक्षकों को अगली वार्षिक आम बैठक के निष्कर्ष तक नियुक्त किया जाएगा और वही लेखापरीक्षक निरंतर अधिकतम तीन वर्षों की अवधि तक पुन-र्नियुक्त करने के पात्र होगें|
24. प्रतिष्ठित सनदीलेखाकारों की फर्म से लेखापरीक्षकों को नियुक्त किया जाएगा|
25. लेखापरीक्षकों को सोसायटी के बहीखातों और वाउचरों को देखने की अनुमति होगी और कार्यपालक समिति से अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए सभी आवश्यक सूचनाएं प्राप्त करने के पात्र होंगे|
26. सोसायटी पंजीकरण अधिनियम,1860 की धारा 4 के अधीन प्रत्येक वर्ष एक बार सोसायटी की गठित शासी परिषद के सदस्यों की सूची रजिस्ट्रार सोसायटी के यहॉं दायर करनी होगी|
विसर्जन:-
27. किसी भी समय यदि सोसायटी को विसर्जित किया जाता है तो सोसायटी की निवल संपत्ति को सदस्यों के बीच वितरित नहीं किया जाएगा, लेकिन सोसायटी पंजीकरण अधिनियम,1860 की धारा 13 एवं 14 के अनुसार, इसी प्रकार के उददेश्यों वाले ऐसे किसी संगठन (नों) को संपत्ति को सौंप सकतर है जैसा परिषद द्वारा निर्णय लिया गया हो|
नियमों एवं ज्ञापन में संशोधन:-
28. सोसायटी पंजीकरण अधिनियम,1860 की धारा 12 एवं 12-ए के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर सामान्य निकाय को इन किसी भी नियमों के साथ संस्था के स्मरण पत्र में संशोधन,परिवर्तन या उन्हें हटाने की शक्ति होगी|
सोसायटी द्वारा और उसके खिलाफ अभियोग:-
29. सोसायटी पंजीकरण अधिनियम,1860 के XXI की धारा 6 के प्रयोजन के लिए, सोसायटी के मुकाअ वह व्यक्ति होगें जिन पर अभियोग चलाया जा सकता है या जिन पर सोसायटी के नाम पर अभियोग चलाया जा सकेगा|
30. सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, (1860 के XXI) के सभी प्रावधान जैसा संघ राजधानी क्षेत्र दिल्ली में प्रवृत्त होंगे, केंद्र सरकार कर्मचारियों के कल्याण आवास संगठन पर लागू होंगे|
"यह प्रमाणित किया जाता है कि यह सोसायटी के नियमों और विनियमों की सही प्रति है"
ह/-
शिवरामाकृष्णन
अध्यक्ष
ह/-
ए के सामंतरे
सचिव
ह/-
के सी
पी आर रामाकृष्णन
कोषाध्यक्ष
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